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शौचालय और वे क्यों हमारी प्रगति के लिए क्यों बहुत महत्वपूर्ण हैं - इस संबंध में तथ्य प्राप्त करें ।

शौचालय का उपयोग भारत में सामाजिक और आर्थिक प्रगति का ताला खोलने, और हजारों बच्चों के जीवन को बचाने के लिए महत्वपूर्ण है ।.

भारत में शौचालय का उपयोग

फिलहाल 564 मिलियन लोग, जोकि भारत की मात्र आधी आबादी है, अभी तक शौचालय का उपयोग नहीं करते। इसके बजाय, वे शौच के लिए खुले मैदान, रेलवे पटरियों, कचरा डंप, पार्क और सड़क के किनारे गड्ढों में खुले में बाहर जाते हैं । यह अविश्वसनीय रूप से खतरनाक है क्योंकि मानव अपशिष्ट डायरिया और अन्य बीमारियों का कारण हो सकता है जोकि, विशेष रूप से बच्चों के लिए, घातक हो सकता है ।

2015 में यह आकलित किया गया था कि विश्व स्तर पर 2.4 अरब लोगों को उन्नत स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं | इनमें से, 946 दस लाख खुले में शौच करते हैं । इनमें से 564 करोड़ लोग भारत में रहते हैं।

ग्रामीण भारत में, जहां आबादी के 61% लोग खुले में शौच करते हैं, यह प्रवृत्ति सभी सामाजिक-आर्थिक समूहों के बीच प्रचलित है। शहरी भारत में जनसंख्या के 10% लोग खुले में शौच करते हैं । दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले आधे से ज्यादा बच्चे शौचालयों का प्रयोग नहीं करते।

खुले में शौच की प्रवृत्ति समाप्त करना केवल शौचालय का उपयोग करना भर नहीं है बल्कि शौचालय की मांग पैदा करना और हर रोज शौचालय उपयोग करने की प्रवृत्ति को जगाना है | खुले में शौच करना एक काफी पुरानी प्रथा है जिसे कई समुदायों में 'सामान्य' प्रवृत्ति के रूप में देखा जाता है। टीम स्वच्छ भारत एक ऐसा आंदोलन है जिसका उद्देश्य एक नई प्रथा पैदा करना है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति शौचालय के महत्व को समझता है और उन का उपयोग करता है |

क्यों शौचालय महत्वपूर्ण हैं ?

शौचालय का उपयोग भारत और दुनिया भर में सभी बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है क्योंकि मानव अपशिष्ट का खुले में रहना दस्त जैसे रोगों का कारण बनता है ।

भारत में हर दिन, पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 400 बच्चे निम्न स्तरीय स्वच्छता और अपर्याप्त सफाई के कारण पैदा होने वाले दस्त से मर जाते हैं। दुनिया भर में हर दिन, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की डायरिया से संबंधित होने वाली मौतों की सर्वाधिक संख्या भारत में है । डायरिया और अन्य स्वच्छता से संबंधित रोग, बच्चों में भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को रोकते हैं जोकि कुपोषण का कारण बनते हैं |

'खुले में शौच' अर्थात अविकसितता । भारत में, पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 38% बच्चे अविकसित हैं अर्थात उनका शारीरिक और मानसिक विकास अल्प है, परिणामस्वरूप शैक्षणिक परिणाम प्रायः अच्छे नहीं आते | विकास अवरुद्धता के परिणाम व्यक्तिगत बच्चे से परे अनुभव किए का सकते हैं क्योंकि आर्थिक और सामाजिक विकास के रूप यह पूरे समुदाय और पीढ़ियों को प्रभावित करता है। अल्प विकसित शरीर, अवरुद्ध दिमाग, और अवरुद्ध जीवन ।

महिलाओं और लड़कियों के लिए, स्वच्छता उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमा के लिए महत्वपूर्ण है। महिलाओं और किशोरियों के लिए, शौचालय उनके मासिक धर्म स्वच्छता के लिए एक स्थान प्रदान करते हैं और शाम और सुबह के समय खुले में शौच के दौरान संभावित उत्पीड़न के जोखिम को कम करने में एक महत्वपूर्ण कदम है |

शौचालय का उपयोग केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। विश्व बैंक के अनुसार, अपर्याप्त स्वच्छता प्रति वर्ष भारत को देश के 2006 के सकल घरेलू उत्पाद के 6.4 % की आर्थिक हानि या 53.8 अरब डालर ( रु 2.4 ट्रिलियन) तक की राशि की हानि का कारण बना, जो हर भारतीय के लिए प्रति वर्ष USD $ 43 के बराबर है।

शौचालय साफ और स्वस्थ समुदायों के लिए आवश्यक हैं जो भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देते हैं। टीम स्वच्छ भारत, 2019 तक सभी के लिए स्वच्छता में सुधार के भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का समर्थन करता है।

विशेष तथ्य :

  • भारत में 564 मिलियन लोग अभी तक एक शौचालय का उपयोग नहीं करते ।
  • भारत में लगभग 400 बच्चे अपर्याप्त स्वच्छता के कारण होने वाले दस्त से रोज मरते हैं।
  • अपर्याप्त स्वच्छता विकास अवरुद्धता से संबंधित है । भारत में 5 वर्ष से अल्प आयु के 10 बच्चों में से 4 बच्चे विकास अवरुद्धता के शिकार हैं |
  • भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने जैसे सरल काम से ही दस्त रोगों में 40% कटौती होती है |

खुले में
शौच बीमारियों
का कारण कैसे बनता है :

How Open Defecation Causes Diseases